बाराबंकी
कैप्टन अब्बास अली ने समाजवादी विचारधारा को भी मजबूत करने के लिये महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इस स्वतंत्रता सेनानी ने आजाद हिन्द फौज के माध्यम से देश को स्वतंत्र कराने के लिए जो संघर्ष किया उसे भुलाया नहीं जा सकता। समाजवाद के पुरोधा डॉ राम मनोहर लोहिया के करीबी रहे कैप्टन अब्बास अली ने समाजवादी विचारधारा को मजबूत बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था। यह बात गांधी भवन में स्वतंत्रता सेनानी, जनता पर्टी के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व एमएलसी रहे स्व कैप्टन अब्बास अली की 103 वीं जयन्ती पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता कर रहे समाजवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने कही। इस दौरान श्री शर्मा ने उनके कई संस्मरण साझा करने हुए उन्हें समाजवादी आन्दोलन को योद्धा बताया। उन्होंने बताया कि स्व अब्बास अली आजादी से पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिन्द फौज (आईएनए) के सेनानी थे। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र रह चुके अब्बास अली वर्ष 1939 में ब्रिटिश इंडियन आर्मी में भर्ती हुए थे। लेकिन, जब नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने सशस्त्र क्रांति का बिगुल फूंका तो वह अंग्रेजी सेना की नौकरी छोड़कर आईएनए में शामिल हो गए। अंग्रेजी शासन में अब्बास अली को मौत की सजा सुनायी गई थी। लेकिन, उस पर अमल से पहले ही मुल्क आजाद हो गया और उन्हें रिहा कर दिया गया। श्री शर्मा ने कहा कि अब्बास अली डॉ राम मनोहर लोहिया, आचार्य नरेन्द्र देव और जय प्रकाश नारायण जैसे समाजवादी नेताओं से प्रभावित होकर राजनीति में आए। वर्ष 1966 में उन्हें संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी का राज्य महासचिव भी बनाया गया था। देश में आपातकाल के दौरान इसका विरोध करने पर कैप्टन अब्बास अली को जेल में डाल दिया गया। बाद में वह एमएलसी और जनता पार्टी के प्रान्तीय अध्यक्ष भी बने। सभा के मुख्य वक्ता पूर्व विधायक सरवर अली खान ने बताया कि अब्बास अली उन समाजवादी नेताओं में रहे है जिन्होने संघर्ष को अपने जीवन का आधार बनाया। डा. लोहिया के अनुयायी होने के बाद उन्होनें गरीबों, शोषितों और किसान मजदूरों की आवाज को कभी कमजोर होने नहीं दिया। वर्तमान पीढी को अब्बास अली जैसे सेनानियों के बारे में पढ़ने और उनके विचारों को अमल करने की जरूरत है। सभा का संचालन पाटेश्वरी पस्राद ने किया। इस मौके पर प्रमुख रूप से मो उमैर किदवाई, विनय कुमार सिंह, समाजसेवी अशोक शुक्ला, सरदार राजा सिंह, सलाउद्दीन किदवाई, सत्यवान वर्मा, मृत्युंजय शर्मा, हुमायूं नईम खान, अशोक जायसवाल, विजय कुमार सिंह, धनंजय शर्मा, नीरज दूबे, राजेश यादव, उमानाथ यादव ‘सोनू‘, अर्ताउरहमान, जमील अहमद अंसारी, मनीष सिंह, जमाल नईम खान, अनिल यादव सहित कई लोग मौजूद रहे।
























Iran demanded Saddam Hussein be tried for killing thousands of Iranians with poison gas in 2005.
Kurt Waldheim became the fourth Secretary-General of the United Nations Security Council in 1971.



