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मोरारजी देसाई को आखिर क्यों छोड़ना पड़ा था प्रधानमंत्री पद

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मोरारजी देसाई को क्यों प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा

मोरारजी देसाई (29 फ़रवरी 1896 – 10 अप्रैल 1995) (गुजराती: મોરારજી રણછોડજી દેસાઈ) भारत के स्वाधीनता सेनानी, राजनेता और देश के चौथे प्रधानमंत्री (सन् 1977 से 79) थे।[1] वह प्रथम प्रधानमंत्री थे जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बजाय अन्य दल से थे। वही एकमात्र व्यक्ति हैं जिन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न एवं पाकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान निशान-ए-पाकिस्तान से सम्मानित किया गया था।

Why did Morarji Desai have to leave the post of Prime Minister?

वह 81 वर्ष की आयु में प्रधानमंत्री बने थे। इसके पूर्व कई बार उन्होंने प्रधानमंत्री बनने की कोशिश की परंतु असफल रहे। लेकिन ऐसा नहीं हैं कि मोरारजी प्रधानमंत्री बनने के क़ाबिल नहीं थे। वस्तुत: वह दुर्भाग्यशाली रहे कि वरिष्ठतम नेता होने के बावज़ूद उन्हें पंडित नेहरू और लालबहादुर शास्त्री के निधन के बाद भी प्रधानमंत्री नहीं बनाया गया। मोरारजी देसाई मार्च 1977 में देश के प्रधानमंत्री बने लेकिन प्रधानमंत्री के रूप में इनका कार्यकाल पूर्ण नहीं हो पाया। चौधरी चरण सिंह से मतभेदों के चलते उन्हें प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा।

Know about the history of 29 November: जानिए 29 नवंबर के इतिहास के बारे में

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Know about the history of 29 November:

आरती साहा ने 1959 में इंग्लिश चैनल को तैरकर पार किया।
कोलकाता में बिड़ला तारामंडल 1962 को खुला।
हिंसा को त्याग कर शांति के रास्ते पर चलने की अपील की थी।
चीन की मुन्चोनाक कोयला खान में 2000 को 100 लोगों की मृत्यु।
संयुक्त राष्ट्र ने 2001 में आतंकवाद विरोधी अमेरिकी प्रस्ताव पारित किया।
इंग्लैंड में पहले मैरिज ब्यूरो की शुरुआत 1650 में हुई।अमेरिका के युद्ध विभाग ने 1789 में स्थायी सेना स्थापित की।
बुसान में 14वें एशियाई खेलों का उद्घाटन 2002 में हुआ।
ईरान ने 2003 में यूरेनियम परिशोधन कार्यक्रम जारी रखने का निर्णय लिया।
मद्रास चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की स्थापना 1836 में हुई।
इटली ने 1911 में ऑटोमन साम्राज्य के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा की।
टेलीफोन से पहला अंतरमहाद्वीपीय संदेश 1915 में भेजा गया।

समाजवादी पार्टी का डेलीगेशन पहुंचा निर्वाचन आयोग

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लखनऊ

समाजवादी पार्टी का डेलीगेशन पहुंचा निर्वाचन आयोग, समाजवादी पार्टी के डेलीगेशन में सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल, विधायक रविदास मेहरोत्रा, राजेंद्र चौधरी और माता प्रसाद पाण्डेय।

रैनबसेरों की व्यवस्था के लिए नये व पुराने सरकारी भवनों को चिन्हित करने के दिये निर्देश

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लखनऊ

शीत ऋतु के मद्देनजर जिलाधिकारी सूर्य पाल गंगवार द्वारा बुलाई गई रैनबसेरों व अलाव के सम्बंध में एक महत्वपूर्ण बैठक। रैनबसेरों की व्यवस्था के लिए नये व पुराने सरकारी भवनों को चिन्हित करने के दिये निर्देश। शीत ऋतु के मद्देनजर जिलाधिकारी के कड़े निर्देश,किसी भी दशा में निराश्रित लोगो को नही दिया जाए खुले में सोने, उनको नज़दीकी रैनबसेरे में पहुचाया जाए। जिलाधिकारी की अनूठी पहल, रैनबसेरों में अब जरूरतमन्दों को मिलेगा खाना, कपड़ा और रहने का स्थान।

ज़रूरतमंदों की मदद के लिए शहर के हर ब्लाक हर तहसील में बनेगा लखनऊ कपड़ा बैंक। ज़रूरतमन्दों को शीत लहर से बचाने के लिए ज़िलाधिकारी ने शुरू की मुहीम, समस्त सरकारी अधिकारी/कर्मचारी 10-10 पुराने कपड़ो का करेगे दान। ईट भट्टो/प्रोजेक्ट साइटों आदि पर कार्य करने वाले माइग्रेटेड लेबरों के रहन सहन की व्यवस्था करने जिम्मेदारी होगी कार्यदायी संस्थाओ की, ईट भट्टो/प्रोजेक्ट साइटों की कार्यदायी संस्थाओ को अपने लेबरों की रहने आदि की व्यवस्था सुनिश्चित करके देना होगा प्रमाण पत्र। हर पुलिस चौकी और डायल 112 को रैनबसेरो से लिंक किया जाए।

इनकम टैक्स विभाग में फर्जी नौकरी स्कैम मामला

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लखनऊ

इनकम टैक्स विभाग में फर्जी नौकरी स्कैम मामला, मामले की जांच अब क्राइम ब्रांच को सौंपी गई, स्कैम में बड़े अफसरों की भूमिका की जांच हो रही, रिमांड पर लेकर प्रियंका मिश्रा से पूछताछ होगी, प्रियंका के पति को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया।, फर्जी इंटरव्यू देने आए अभ्यर्थियों को बुलाया गया, आयकर विभाग के कई बड़े अफसर छुट्टी पर गए, कल दिनभर बंद रहा बड़े अफसरों का कार्यालय.

शादी समारोह में शामिल होने आई किशोरी के साथ सामूहिक दुराचार

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बंथरा थाना क्षेत्र शादी समारोह में शामिल होने आई किशोरी के साथ सामूहिक दुराचार, किशोरी को अगवाकर दो लोगो ने किया दुराचार, बंथरा थाना के बंथरा कस्बा का मामला.

गौशाला के नाम पर सरकारें कर रहीं लूट

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लखनऊ

किसान नेता राकेश टिकैत का बयान, किसान महापंचायत में लखनऊ पहुंचे, गौशाला के नाम पर सरकारें लूट कर रहीं, महंगाई बढ़ते ही जा रही, आवाज पर पाबंदी है, कैमरा,कलम पर बंदूक का पहरा है – राकेश टिकैत

Know about the history of 28 November: जानिए 28 नवंबर के इतिहास के बारे में

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Know about the history of 28 November: जानिए 28 नवंबर के इतिहास के बारे में

लंदन में द रॉयल सोसायटी का 1660 में गठन हुआ।
पनामा ने 1821 में स्पेन से आजाद होने की घोषणा की।
डच सेना ने 1854 में बोर्नियो में चीनी विद्रोह को दबाया।
ब्रिटेन का खोजी वर्ने कैमरून 1875 में पश्चिमी अफ्रीका पहुँचा।
चीन के प्रधानमंत्री चाऊ एन-लाई 1956 में भारत दौरे पर आये।
मोरीटानिया ने 1960 में औपचारिक रुप से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की।
डोमनिकन रिपब्लिक ने 1966 में संविधान अपनाया।
चुनावों के उपरान्त जान मेजर 1990 में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने।
प्रधानमंत्री आई के गुजराल ने 1997 में अपने पद से इस्तीफा दिया।
नेपाल ने 2001 में माओवादियों से निपटने हेतु भारत से दो हैलीकॉप्टर मांगे।